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सीतामता अभ्यारण्य प्रतापगढ़ राजस्थान

 सर्वाधिक जैव विविधता वाले इस अभ्यारण्य को चीतल (चोसिंगे) यह एंटी लोप प्रजाति का दुर्लभ जीव है, स्थानीय भाषा में भेडल कहा जाता है यह अभ्यारण्य की शरण स्थली है, उड़न गिलहरी का स्वर्ग के नाम से जाना जाता है, इस अभ्यारण्य में राजस्थान के सर्वाधिक सांगवान के वृक्ष पाए जाते है, उड़न गिलहरी सामान्यतः महुआ के पेड़ पर निवास करती है इन्हे देखने के लिए सूर्योदय का समय सर्वाधिक उपयुक्त रहता है जिसका स्थानीय नाम आशोवा है, यहां पर हिमालय के बाद सर्वाधिक वन औषधीय पायी जाती है, इसमें सीता माता का मंदिर लव कुश नामक दो जल स्त्रोत, यह से करमोई और झाखम नदी का उद्गम होता है, यह अभ्यारण्य अरावली विंध्याचल पर्वत माला तथा मालवा के पठार के संगम पर स्थित है।